कॉलेज के दिनों का
कुछ-कुछ भूलने लगा हूं ।
कुछ चेहरे याद रह गए हैं
तो नाम पता नहीं
अगर नाम स्मरण है
तो सूरत गुमशुदा हो गई
कुछ चेहरे गहरे बैठे हैं
दिल में
कुछ नाम छप गए हैं
दिमाग में
फिर भी कुछ अधूरा सा है याददाश्त में
सही हूं मैं , सही में
कुछ-कुछ भूलने लगा हूं ।
क्लास रुम तो याद है
लेकिन लैबोरेटरी के प्रेक्टिकल नहीं
रीडिंग रूम की सीढ़ियां
अरे हां, वहीं जो संकरी सी थी
याद है, भूलना शुरु हुआ है
भूला नहीं हूं, सब कुछ
हां ये सच है
कुछ - कुछ भूलने लगा हूं ।
यादों से इतना प्यार क्यों है तुम्हें ?
बीते से इतना लगाव क्यों है तुम्हें ?
पूछना पड़ेगा
भूलना जरूरी तो नहीं होता
विज्ञान में , मनोविज्ञान में
वास्तविकता से पीछा छुड़ा पाओगे
अधेड़ होते शरीर को
उसके थके से दिमाग को
क्यों याद रखना है सब कुछ
जो तुम छोड़ आए हो पीछे, बहुत पीछे
क्या भूल नहीं जाना चाहिए
तुम्हें वो सब
जो छूट गया है पीछे, बहुत पीछे
चाहता हूं तो
कि सब भूल जाऊं
कुछ - कुछ भूलने लगा है ।
जब धीरे धीरे सबकुछ भूल जाऊंगा
तब भी याद रहेगा
नाम और चेहरा तुम्हारा
चलो मान लिया
भूलना होगी एक प्रक्रिया
पर अपवाद हर कहीं होते हैं
ये तो कॉलेज में कई बार पढ़ा होगा
जब वाजिब तर्क मौजूद ना हो
तो "एक्सेप्शन ऑर एवरीव्हेयर"
कुछ कुछ भूलने लगा हूं
फिर भी नहीं भूलूंगा बहुत कुछ
विश्वास है
अपवादों के होने का ।
क्यों होते हैं ?
नहीं पता ।
कुछ-कुछ भूलने लगा हूं ।
कुछ चेहरे याद रह गए हैं
तो नाम पता नहीं
अगर नाम स्मरण है
तो सूरत गुमशुदा हो गई
कुछ चेहरे गहरे बैठे हैं
दिल में
कुछ नाम छप गए हैं
दिमाग में
फिर भी कुछ अधूरा सा है याददाश्त में
सही हूं मैं , सही में
कुछ-कुछ भूलने लगा हूं ।
क्लास रुम तो याद है
लेकिन लैबोरेटरी के प्रेक्टिकल नहीं
रीडिंग रूम की सीढ़ियां
अरे हां, वहीं जो संकरी सी थी
याद है, भूलना शुरु हुआ है
भूला नहीं हूं, सब कुछ
हां ये सच है
कुछ - कुछ भूलने लगा हूं ।
यादों से इतना प्यार क्यों है तुम्हें ?
बीते से इतना लगाव क्यों है तुम्हें ?
पूछना पड़ेगा
भूलना जरूरी तो नहीं होता
विज्ञान में , मनोविज्ञान में
वास्तविकता से पीछा छुड़ा पाओगे
अधेड़ होते शरीर को
उसके थके से दिमाग को
क्यों याद रखना है सब कुछ
जो तुम छोड़ आए हो पीछे, बहुत पीछे
क्या भूल नहीं जाना चाहिए
तुम्हें वो सब
जो छूट गया है पीछे, बहुत पीछे
चाहता हूं तो
कि सब भूल जाऊं
कुछ - कुछ भूलने लगा है ।
जब धीरे धीरे सबकुछ भूल जाऊंगा
तब भी याद रहेगा
नाम और चेहरा तुम्हारा
चलो मान लिया
भूलना होगी एक प्रक्रिया
पर अपवाद हर कहीं होते हैं
ये तो कॉलेज में कई बार पढ़ा होगा
जब वाजिब तर्क मौजूद ना हो
तो "एक्सेप्शन ऑर एवरीव्हेयर"
कुछ कुछ भूलने लगा हूं
फिर भी नहीं भूलूंगा बहुत कुछ
विश्वास है
अपवादों के होने का ।
क्यों होते हैं ?
नहीं पता ।
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