ग़र जिंदगी एक किताब है
तो तुम कवर हो मेरी जिंदगी का ।
मेरी जिंदगीनुमा किताब को तुम्हीं ने
आकर्षक बनाया
खुद थपेड़े सहती रही
और मुझे बचाती रही हर नुकसान से
मैं फट कर बिखर सकता था कई बार
संवारती रही, सजाती रही
सारे जख्म सहकर
कवर होने का फर्ज तुम निभाती रही
लेकिन मैं अपने किताब होने के कर्तव्य से दूर हूं ?
बस शब्दों और वाक्यों पर इतरा रहा हूं
लेकिन तुम हो तभी तो मैं हूं ।
कवर हो तुम मेरी जिंदगी का
और जिंदगी एक किताब है ।
और जिंदगी एक किताब है ।
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