मिठास
Saturday, October 23, 2010
एक सांझ
एक सांझ बैठी है
सूरज के साथ
डूबते हुए आसमान में
फिजूलखर्ची कर दी
तकदीर तो पहले सी ही उजड़ी थी
वक्त ने उनकी तस्वीर कितनी धुंधली कर दी है
जो जमा यादें सहेजकर रखी थीं...
एक रोज उनकी फिजूलखर्ची कर दी
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